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1 अप्रैल मूर्ख दिवस ( April fools day )- अप्रैल फूल के दिन किये गए थे ये प्रसिद्ध माजक

अप्रैल मूर्ख दिवस ( April fools day Facts )
Written by knowledgehindime

अप्रैल मूर्ख दिवस – April fools day Facts In Hindi : 1 अप्रैल का दिन बड़ा अजीब सा ही होता है, इस दिन यदि कोई कुछ भी बोले उसकी बात पर भरोषा करना बहुत मुश्किल हो जाता है, क्योंकि यह दिन पुरे विश्व में एक दुसरे को मुर्ख बनाने के लिए प्रसिद्ध है इसलिए इस दिन यदि कोई कुछ भी बोले तो यह लगता है की वह हमें मुर्ख या उल्लू बनाने की कोशिस कर रहा है.अप्रैल मूर्ख दिवस April fools day Facts

ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार मनाये जाने वाले 1 अप्रैल मुर्ख दिवस / अप्रैल फूल का दिन या तो खुद मुर्ख / उल्लू बनकर या दूसरों को मुर्ख बनाकर इसी तरह से व्यतीत किया जाता है, लेकिन इस दिन पर एक हद तक ही दूसरों को मुर्ख बनाना सही है क्योंकि यह दिन केवल जोक्स या इंटरटेनमेंट के लिए है, इसके आलावा इसका कोई दूसरा उदेश्य नहीं है. बहुत से देशों में जैसे अफ्रीका, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, बिट्रेन आदि में यह दिन केवल दोपहर तक मुर्ख बनाने का होता है, जबकि अमेरिका, फ़्रांस, रूस, जापान, जर्मनी आदि देशों में अप्रैल फूल पुरे दिनभर चलता है.

इस दिन पर सोशल मीडिया, वेबसाइट, Youtube पर बहुत सी अफवाहे फैलाई जाती है, और इस अफवाह पर बहुत से लोग भरोशा कर अपना ही उल्लू बना लेते है, यह दिन न ही एक छुटी का दिन होता है और न ही इस पर कोई कार्यक्रम मनाया जाता है, क्योंकि यह केवल मनोरंजन के लिए है और इससे कोई सिख भी नहीं मिलती है.

अप्रैल फूल दिवस की शुरुआत कैसे हुई

पहला अप्रैल फूल दिवस कब मनाया गया था इसकी जानकारी तो नहीं मिलती है लेकिन अलग अलग विद्वानों के अनुसार इस दिवस को मनाये जाने के अलग अलग तथ्य प्रस्तुत किये जाते है, कुछ विद्वानों के अनुसार इस दिन की प्रेरणा रोमन के हिलेरिय त्यौहार से मिली थी, जबकि फ्लेमिश कवि डे -डेने ने अपने एक लेख में एक ऐंसे आमिर आदमी का वर्णन किया था जिसने अपने नौकरों को 1 अप्रैल के दिन किसी मूर्खतापूर्ण कार्य को करने के लिए भेजा था.

ज्यॉफ्री सॉसर्स की किताब केंटरबरी टेल्स में इस बात का वर्णन मिलता है की इंगलैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय और रानी एनी की सघाई 32 मार्च 1381 को की जाने की घोषणा की जाती है, और लोग इस बात पर यकीन कर लेते है लेकिन बाद में वह समझ गए की वह मुर्ख बन गए और तब से 1 अप्रैल को मुर्ख दिवस के रूप में मनाया जाने लगा.

अप्रैल फूल के दिन किये गए प्रसिद्ध माजक –

अप्रैल फूल का दिन मजाक का दिन होता है और इस पर ऐंसे बहुत से मजाक किये गए तो सैकड़ों लोगो के लिए एक सचाई बन गए थे और इन्ही मजाक में कुछ मजाक हम आपको यहाँ पर बताने वाले है –

👉 न्यूजीलैंड के रेडियों स्टेशन द एजेज मॉर्निंग मैडहाउस के द्वारा 1 अप्रैल  को प्रधानमंत्री की सहायता लेकर यह सुचना दी गयी थी की मोबाइल फोन पर बैन लगाया जाने वाला है, तो इस सुचना के विरोध में सैकड़ों लोगो की काल आने लगी.

👉 1 अप्रैल 1698 को लोगो को यह सुचना मिलती है की टावर ऑफ़ लन्दन में शेर की धुलाई की जाएगी, तो इस पर उस जगह में सैकड़ों लोग पहुँच गए.

👉 बिट्रेन के द सन अकबार ने सन 2010 में अपने स्क्रेच एंड स्निफ पेपर के बारे में एक लेख लिखा था जिसमे इस पेपर पर आने वाली खुशबु के बारे में लिखा था व इस पेपर की खुशबु को सूंघने के लिए इसके साथ एक सैम्पल भी दिया था, जो की एक सिंपल का पेपर था. तो इस पर अख़बार के जितने भी पाठक थे उन सभी ने इस खुसबू को सूघने के लिए अपने नाक पेपर पर लगाई और इस तरह वह उल्लू बन गए.

👉 1860 में लन्दन में बहुत से लोगो को डाक पोस्ट मिलती है की टावर ऑफ़ लन्दन में श्याम को सफ़ेद गधो का स्नान देखने का प्रोग्राम रखा गया है, और इसके लिए आपको आमंत्रित किया गया है, इस समय टावर ऑफ़ लन्दन पर आम जनता के आने के लिए प्रतिबंध था, लेकिन यहाँ पर बड़ी संख्या में भीड़ जमा हो गयी.

अप्रैल मूर्ख दिवस रोचक तथ्य / April Fools Day Facts Hindi

  • 1979 में ईरान ने 1 अप्रैल को गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की थी, इसके 40 वर्षों में बाद भी इसे एक मजाक ही समझा जाता रहा है.
  • गूगल के द्वारा जीमेल /GMAIL की शुरुआत 1 अप्रैल 2004 को की गयी थी.
  • अमेरिकी बहुराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनी APPLE की स्थापना 1 अप्रैल 1976 को की गयी थी.
  • इस दिन को चीन में DING DAY के रूप में मनाया जाता है इस दिन पर चीन में लोगो के द्वारा लम्बी लम्बी डिंग मारी जाती है.
  • 2003 में चीन और दक्षिण कोरिया की कुछ वेबसाइट में यह बताया गया था की CNN के द्वारा माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट की हत्या की रिपोर्ट दी गयी है और इसके बाद दक्षिणी कोरिया के स्टॉक मार्किट में 1.5% की गिरावट हुई.
  • फ़्रांस में इस दिन पर पहले जुलुस निकला जाता था जिसमे शहर के सबसे मोटे व्यक्ति को घोड़ागाड़ी में बैठाया जाता था, जिससे लोग उस पर हंस सके.

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