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Saturday, 5 May 2018

Garhwal Rifles history in hindi (गढ़वाल रायफल का इतिहास हिंदी में)

Garhwal Rifles history in hindi (गढ़वाल रायफल का इतिहास हिंदी में)
Garhwal Rifles history in hindi : -स्वतंत्रता से पहले जब Uttarakhand भी बिट्रिश सरकार के अधिकार में आ गया था तब गोरखाओ से अलग एक गढ़वालीयों की एक रेजीमेंट बनाने का प्रस्ताव रखा गया इसके बाद अल्मोड़ा में 5 मई 1887 को इस बटालियन का गठन हुआ इस बटालियन को कालोडांडा नाम की पहाड़ी पर भेजा गया बाद में इस पहाड़ी का नाम लैंसडाउन रखा गया. 

1890 2 बटालियन को जब बर्मा भेजा गया इस बटालियन में  Garhwali और गोरखा सेनिक थे बर्मा में हुए युद्ध में गढ़वालीयों के बहुत अच्छे प्रदर्शन के कारण इसे Garhwal Rifles नाम दे दिय गया

एक शक्तिशाली यूनिट है. Garhwal Rifles का ऑफिस लैंसडाउन है जो पौड़ी गढ़वाल से लगबग 80 KM की दूरी पर स्थित है. Garhwal के युवा Army में Bharti होने के लिए कड़ी मेहनत करते है और भारती कैंप में भाग लेते है. और Uttarakhand के युवाओ के लिए Garhwal Rifles में Barti होना एक सम्मान की बात है.

भारतीय सेना में Garhwal Rifles अपने पराक्रम के द्वारा जानी जाती है सेना के भर्ती होने के लिए युवाओं को कठीन परिश्रम से होकर गुजरना पड़ता है.
Garhwal Rifles history in hindi (गढ़वाल रायफल का इतिहास हिंदी में)

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