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छठ पूजा का पर्व क्यों मनाया जाता है

Written by knowledgehindime
छठ पूजा का पर्व क्यों मनाया जाता है : छठ पूजा का पर्व पुरे भारत में हिन्दुओ के द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है दीपावली के बाद इस पर्व के शुरुआत 6 दिन बाद होती है. छठ पूजा खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में मनाया जाने वाला महत्पूर्ण पर्व है. इस दिन सुबह के समय सूर्यदेव की आराधना की जाती है, जिसमे कमर तक पानी में रहकर सूर्यदेव को जल भी चढाया जाता है.

छठ पूजा का पर्व क्यों मनाया जाता है

पूजा का पर्व क्यों मनाया जाता है

सूर्य को शक्ति और उर्जा का श्रोत माना जाता है जिस कारण छठ पूजा पर सूर्य भगवान को जल चढाकर ऊर्जावान और शांति के प्राप्ति होती है, पहले छठ पूजा का पर्व केवल बिहार में मनाया जाता था लेकिन मध्यकाल के समय से यह पर पुरे देश में प्रचलित हो गया है, जिसको मनाये जाने के पीछे कुछ मिथ है, जिनकी जानकारी आपको दी जा रही है –


1. राजा प्रियंवद का व्रत

पुराणों के अनुसार राजा प्रियंवद की कोई संतान नहीं थी पुत्र प्राप्ति के लिए प्रियंवद यज्ञ किया जिसमे महर्षि कश्यप को आमंत्रित किया गया था. महर्षि कश्यप ने प्रियंवद की पत्नी मालिनी को आहुति के लिए बनाई गई खीर दी। इससे उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया लेकिन वो पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ।
प्रियंवद अपने मरे पुत्र को लेकर श्मशान गए और पुत्र के वियोग में प्राण त्यागने लगे। तभी भगवान ब्रम्हा की पुत्री देवसेना प्रकट हुईं और उन्होंने राजा को पुत्र प्राप्ति के लिए उनकी पूजा करने और दूसरों को पूजा के लिए प्रेरित करने को कहा। प्रियंवद पुत्र प्राप्ति के लिए देवी षष्ठी का व्रत किया और इससे उनकी पत्नी मालिनी ने पुत्र को जन्म दिया. यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी और इसकी कारण इस दिन को छठ पूजा होती है।

2. माता सीता का व्रत

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब राम सीता 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए सीता जी ने मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर छह दिनों तक भगवान सूर्यदेव की पूजा की थी।मुग्दल ऋषि ने माता सीता पर गंगाजल छिड़का और उन्हें पवित्र किया, शुक्ल पक्ष को सीता माता ने छठ पूजा के पर्व की शुरुआत बिहार के मुंगेर गावं से की.

3. सुर्यपुत्र कर्ण की आराधना

कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और वो रोज सूर्य को अर्घ्य देने के लिए कमर तक पानी में घंटो खड़े रहते थे। 
कर्ण भगवान् सूर्य की ही कृपा से एक महान योद्धा बने थे. जिससे छठ पूजा के पर्व पर सूर्य को अर्घ्य दान की परम्परा प्रचलित है.


4. द्रोपदी का व्रत

पड़ाव जब अपना सारा राजपाठ जुए में हार गए थे तो तब दौपदी ने छठ व्रत रखा था। इस व्रत ने द्रोपदी की मन की इच्छा को पूरा किया और पड़ावों को जुए में हारा अपना सारा राजपाठ वापस मिल गया था।

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